क्या आप जानते है खजुराहो की कामुक मूर्तियों के पीछे की कहानी ? हैरान कर देगी ये इतिहास की ये सच्चाई

खजुराहो में 1 और 2 सितंबर को ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें ब्राजील, चीन, रूस, साउथ अफ्रीका जैसे देश शामिल हुए.. खजुराहो मंदिर की मूर्तियों के बारे में भारतीय जनमानस में हमेशा से एक अलग ही विचार रहा है..  लेकिन सच्चाई उससे कहीं अलग है जो वामपंथी इतिहासकारों के कारण सामने नहीं आई है ..

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पाश्चात्य प्रभाव के कारण हमेशा से आधुनिक भारत में सेक्स को निकृष्ट दृष्टि से देखा जाता है .. और आधुनिक लोग पश्चिम जीवन दर्शन को स्वच्छन्द मानते है ..

मोर्य वंश के महान सम्राट चन्द्रगुप्त के पौत्र महान अशोक ने कलिंग युद्ध के पश्चात् बौद्ध धर्म अपना लिया। अशोक अगर राजपाठ छोड़कर बौद्ध भिक्षु बनकर धर्म प्रचार में लगता तब वह वास्तव में महान होता । परन्तु अशोक ने एक बौद्ध सम्राट के रूप में लगभग २० वर्ष तक शासन किया।

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आचार्य चाणक्य ने जिस अखंड भारत के निर्माण हेतु आजीवन संघर्ष किया उसका लाभ भी सनातन धर्म को न मिल पाया, आचार्य चाणक्य जीवन भर चन्द्रगुप्त मौर्य को संचालित करते रहे, परन्तु आचार्य चाणक्य के स्वर्गवास के बाद चन्द्रगुप्त ने जैन धर्म अपना लिया और जैन सम्प्रदाय के प्रचार प्रसार में ही जीवन व्यतीत किया, अंत में संथारा करके मृत्यु को प्राप्त हुआ ।

अहिंसा का पथ अपनाते हुए उसने पूरे शासन तंत्र को बौद्ध धर्म के प्रचार व प्रसार में लगा दिया। अत्यधिक अहिंसा के प्रसार से भारत की वीर भूमि बौद्ध भिक्षुओ व बौद्ध मठों का गढ़ बन गई थी।

उससे भी आगे जब मोर्य वंश का नौवा अन्तिम सम्राट बृहदरथ मगध की गद्दी पर बैठा ,तब उस समय तक आज का अफगानिस्तान, पंजाब व लगभग पूरा उत्तरी भारत बौद्ध बन चुका था ।जब सिकंदर व सैल्युकस जैसे वीर भारत के वीरों से अपना मान मर्दन करा चुके थे, तब उसके लगभग ९० वर्ष पश्चात् जब भारत से बौद्ध धर्म की अहिंसात्मक निति के कारण वीर वृत्ति का लगभग ह्रास हो चुका था, ग्रीकों ने सिन्धु नदी को पार करने का साहस दिखा दिया।

सम्राट बिन्दुसार और सम्राट अशोक धर्म के बड़े अनुयायी थे l यह वह कालखंड था जब शासन से बौद्ध धर्म के अनुयायियों को सारी सुविधाओं दी जा रही थी और शस्त्र और सुविधाओ के बल पर 90% लोग बौद्ध धर्मं अपना चुके थे l

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बौद्ध प्रभाव के चलते यौन भावनाओं के प्रति न सिर्फ संकोच होने लगा बल्कि इसे पाप पुन्य से जोड़ कर देखा जाने लगा l अब यहाँ पुरुष तो बौद्ध के सिधान्तों पर चलने लगे, परन्तु स्त्रियाँ…

अब यहाँ पुरुष तो बौद्ध के सिद्धांतों पर चलने लगे, परन्तु स्त्रियों के मन में अभी भी प्रेम भावना से संबंध बनाने की भावनाएं रहती थी l इसी काल में जब यवनों का भारत पर आक्रमण हुआ, तब यहाँ बौद्ध मठ विलासिता का केंद्र बनने लगे थे.. यवनों ने बौद्ध स्त्रियों के साथ शारीरिक संबंध कायम किये जिससे भारत जो अफगानिस्तान तक फैला हुआ था उसकी सीमाएं असुरक्षित होने लगी.

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जब बौध धर्म के अनुयायी वृहद्रथ के सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने भारत को यवनों के द्वारा लुटते देखा तो पुष्यमित्र शुंग ने वृहद्रथ की हत्या करके शासन को अपने हाँथ में लिए और पुनः वैदिक धर्म की स्थपाना की लेकिन चूँकि भारत में उस काल में लोग गृहस्थ आश्रम त्याग चुके थे इसलिए …

चूँकि भारत में उस काल में लोग गृहस्थ आश्रम त्याग चुके थे इसलिए उनकी काम भावना ख़त्म हो चुकी थी .. अब वंश आगे कैसे बढे इसके लिए लोगों की काम भावना जागृत करना आवश्यक हो गया .. इसी वजह से भारत में अजंता अल्लोरा की गुफाओं और खजुराहो जैसे मंदिरों का निर्माण हुआ होगा ताकि वापस यहाँ के लोगों में यौन भावना को जगाया जाए और वे वापस इस तरफ आकर्षित हो अपना वंश कायम कर सकें l

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित खजुराहो मंदिर में ऐसी मूर्तियाँ हैं जिसमे स्त्री और पुरुषों के यौन संबंध बनाते हुए झलक देखने मिलती है। किसी समय यह स्थान खजूर के जंगल के लिए जाना जाता था। इसी वजह से इसका नाम खजुराहो पडा है।पर अब यह खजूरों के लिए नहीं बल्कि इन मूर्तियों के लिए फेमस है l

इन काम क्रिया करती मूर्तियाँ श्रद्घालुओं और दर्शनार्थियों के लिए आश्चर्य का पात्र बन जाती हैं, कि काम-इच्छा और मुक्ति का ऐसा मेल आखिर क्यूँ है! इस विषय में कई सारी कथाएँ हैं जो यह भेद खोलती हैं कि मंदिर की दीवारों पर कामुक मूर्तियां क्यों बनाई गयी हैं!

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इस मंदिर के बारे में एक कहानी और बताई जाती है कि जिसमे हेमावती नाम की एक ब्राह्मण कन्या का ज़िक्र आता हैl वह वन में स्थित सरोवर में स्नान कर रही थी तभी चंद्रमा ने उसे देख लिया और…

हेमावती वन में स्थित सरोवर में स्नान कर रही थी तभी चंद्रमा ने उसे देख लिया और उसे देखते ही मुग्ध हो गयाl फिर चंद्रमा ने हेमावती को वशीभूत कर लिया और उसके साथ संबंध बना लिए l पर जब हेमावती ने इसी से एक बालक को जन्म दिया तब समाज ने उसे और उसके बालक को अपनाने से इंकार कर दिया l इस कारण उसे बच्चे का पालन पोषण भी वन में रह कर ही करना पड़ा l

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बालक का नाम चन्द्रवर्मन रखा गया जिसने बड़े होने के बाद…

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बड़ा होने पर उसी बालक चन्द्रवर्मन ने अपना राज्य कायम किया। तब उसकी माँ हेमावती ने चन्द्रवर्मन को ऐसा एक मंदिर तैयार करने के लिए प्रेरित किया जिससे सभी लोगों के अंतर में दबी हुई कामनाओं का खोखलापन दिखाई दे ताकि जब इसी मंदिर में प्रवेश करें तो बुराइयों को द्वार पर ही छोड़ आये l

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उस ज़माने में यौन ऐसी चीज़ नहीं थी जिसमे बहुत से प्रतिबन्ध लगाये जाएँ l यहाँ तक की पिता अपनी पुत्री से…

पिता अपनी पुत्री से विवाह कर सकता था। हरिवंश पुराण अध्याय के अनुसार, मनु ने अपनी पुत्री इला, वशिस्ठ ने अपनी पुत्री सतरूपा, और सूर्य ने ऊषा से विवाह किया।
अच्छी संतानोत्पत्ति के लिए आर्य लोग देव वर्ग के किसी भी पुरुष के साथ अपनी स्त्रियों को सम्भोग की अनुमति देते थे जिसे अवदान कहा गया है।

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यहाँ तक भी बात थी कि पशुओं के साथ भी काम क्रिया…

आर्यों में पशुओं के साथ यौनाचार करना भी प्रचलित था! ऋषि किन्दम द्वारा हिरनी के साथ मैथुन किये जाने की कहानी के बारे में काफी लोग जानते हैं । सूर्य द्वारा घोड़ी के साथ मैथुन किये जाने का उदाहरण भी काफी लोग जानते हैं l पर इन सब में से सबसे वीभत्स उदाहरण वो है जहाँ अश्वमेघ यज्ञ में स्त्री द्वारा घोड़े के साथ मैथुन किया गया थाl

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खुलेआम मनोरंजन के लिए भी तब तक किया जाता था सेक्स, जब तक…

आप यह बात जान कर दंग रह जायेंगे कि एक खेल के रूप में भी यौन संबंध बनाये जाते थे l यहाँ सभी के सामने उनके मनोरंजन के लिए पहले स्त्री के कपडे उसके तन से एक-एक कर हटाये जाते थे फिर सेक्स किया जाता था l ऐसा तब तक होता था जब पुरुष वहां उपस्थित हर स्त्री के साथ संबंध न बना ले l इसका नाम था ‘घट्कंसुकी’ l

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महाभारत के आदि पर्व के अनुसार अगर कुंवारी महिला का मन काम क्रिया करने का हो तो…

महाभारत के आदिपर्व के अनुसार अगर कुंवारी महिला का मन काम क्रिया करने का हो तो उसकी इच्छा को पूर्ण करना ही करना होता है l उसकी इच्छा का पूरा ना होने धर्मं का मर जाना है l उलूपी ने अर्जुन को बताया था कि अगर कोई महिला यौन चाहे तो उसके साथ एक रात बिताना धर्म के खिलाफ नहीं l

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रिग वेद के दसवें मंडल में यम और यमी का ज़िक्र हुआ है जो भाई बहन थे l यमी ने यम के साथ भी यौन क्रिया की इच्छा…

रिग वेद के दसवें मंडल में यम और यमी का ज़िक्र हुआ है जो भाई बहन थे l यमी ने यम के साथ भी यौन क्रिया करने की इच्छा प्रकट की थी जिसे करने से यम ने इंकार कर दिया l इस पर यमी का मानना था किअगर अपने भाई के होते हुए भी उसकी इच्छाएं पूरी नहीं हो, तो ऐसे भाई का क्या फायेदा !

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उस वक्त पर औरतों को कुछ समय के लिए भाड़े पर देने की…

उस वक्त औरतों को कुछ वक्त के लिए भाड़े पर देने की प्रथा भी थी। राजा ययाति ने अपनी पुत्री माधवी अपने गुरु गालव को भेंट में दी थी। गालव ने अलग अलग अवधि के लिए माधवी को तीन राजाओं को भाड़े पर दिया। उसके बाद उसने उसे विवाह करने के लिए विश्वामित्र को दे दिया। वह पुत्र उत्पन्न होने तक उनके साथ रही। उसके बाद गालव ने माधवी को वापस ले फिर से पिता ययाति को लौटा दिया!

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संत अगस्त्या ने अपनी पुत्री को…

संत अगस्त्या ने अपनी पुत्री को पहले रहा विदर्भ को दे दिया था और जब उनकी पुत्री की विवाह करने की आयु आई तो खुद उससे विवाह रचा लिया l 

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