CM योगी के नाम सुसाइड नोट लिख युवक ने लगाई फांसी, आत्महत्या की वजह जानकर सबकी आंखें हो गई नम

अपनी परेशानियों से परेशान हो कर मुखिया मंत्री को सुसाइड लेटर लिख कर भेजने वाले 22 वर्षीया युवा किसान ने अपनी ही माँ की साडी से फांसी लगा कर आत्महत्या करली । पुलिस को मिले सुसाइड के अनुसार बैंक कर्मी और साहूकार उसे और उसके पिता को काफी परेशान कर रहे थे। बता दे की ये मामला उत्तर प्रदेश के बांदा जिले का है।

बांदा सेहर से करीब छेह किलोमीटर दूर कंवारा गाओ के रहने वाले अनुज वाजपेयी ने शुक्रवार को अपने घर में खुद की माँ की साडी से फंदा लगा कर आत्महत्या करली और जब उनकी माँ को उनका शव लटकता दिखा तब तक काफी देर हो चुकी थी | मोत के कुछ ही समय बाद एडीएम (न्यायिक) दिवाकर सिंह, एसडीएम सदर ए थमीम अंसरिया, अपर एसपी एलसीके पाल मौके पर पहुंचे और जांच-पड़ताल की।

बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया और अनुज की जेब में से एक लीटर भी मिला था ।उपि के मुख्या मंत्री को लिखा गया इस लीटर में लिखा था की उसके पिता ने बैंक और साहूकारों से कर्जा ले लिया हैं और अब वह उसे लोटा नहीं पा रहे हैं और पिता की पिछले छेह महीने से तबियत काफी खराब चल रही हैं इस दौरान बैंक के कर्मचारी और गांव के साहूकार उसे और उसके पिता को बहुत परेशान करते थे। इसी वजह से वह आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया।

पिछले दो सालों से खेतों में कुछ नहीं हुआ। बहन की शादी में काफी कर्जा लेना पड़ा। सुसाइड लेटर की अंतिम लाइन में लिखा है कि जिला प्रशासन को सूचना भी दी लेकिन प्रशासन ने कोई तवज्जो नहीं दिया। चचेरे भाई सुनील ने बताया कि करीब 3 साल पूर्व पिता ने इलाहाबाद तुलसी ग्रामीण बैंक, कालूकुआं ब्रांच से 50 हजार रुपये कर्ज लिया था, जो बढ़कर 3 लाख रुपये हो गया। कर्ज न चुका पाने पर पिता का मानसिक संतुलन बिगड़ गया। तब से घर की पूरी जिम्मेदारी अनुज पर थी। एक साल पहले उसने बहन पूजा की शादी में साहूकारों से एक लाख रुपये कर्ज लिया था। अनुज अविवाहित और तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। दो भाई बनारस में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।

 बाद में जब प्रशाशन और पुलिस द्वारा छान बिन करने के बाद हवाला देते हुए कहा की अनुज के पिता ने बैंक से 50 हजार का लोन लिया हुआ हैं और वह कर्जा माफ़ भी करदिया गया है |डीएम ने खुद कर्जा माफ़ी का प्रमाण पात्र भी दिखया हैं और साथ ही यह भी कहा कि जांच में साहूकार से कर्ज लेने का अब तक कोई भी सबूत नहीं मिला हैं । आर्थिक स्थिति सामान्य है। 1.362 कृषि भूमि है। इसलिए कर्ज आदि के कारण आत्महत्या किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमार्टम कराया गया है। अन्य तथ्यों की जांच पुलिस कर रही है। उधर, इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक कालू कुआं प्रबंधक हरीशंकर गुप्त ने कहा है कि किसानों से कोई वसूली नहीं की जा रही। न ही कोई नोटिस जारी किया गया है। प्रबंधक ने अनुज किसान के प्रति संवेदना जताई।

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