लोगों को लुभा रही है वरुण कुमार के गाड़ियों का पंचर बनाने से आईएएस ऑफिसर बनने तक की कहानी

आजकल ज्यादातर छात्र आईएएस बनाने का सपना देखते हैं लेकिन हर किसी का यह सपना पूरा नहीं हो पाता है. यह तो हम सभी जानते ही हैं कि आईएएस बनना कोई आसान काम नहीं है. इसके लिए छात्रों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है. देश में आज कई ऐसे कई छात्र देखने को मिले हैं. जिन्होंने काफी परेशानी झेलने के बाद भी अपना सपना नहीं भूला और आईएएस ऑफिसर बनकर लोगों को साबित करके दिखाया कि हर चीज संभव है. ऐसे ही एक पंचर बनाने वाले से आईएएस बानने की कहानी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. लोगों को इस पंचर वाले की कहानी बेहद पसंद आ रही है. दरअसल फेसबुक पर humans of Lbsnaa नाम के पेज पर इस आईएएस ऑफिसर की कहानी शेयर की गई है.

"Twelve years ago I could not have imagined even in my wildest dreams that I would be where I am today. Heck, I wasn’t…

Posted by Humans of Lbsnaa on Saturday, September 22, 2018

शेयर की गई कहानी के अनुसार इन आईएएस का नाम वरुण कुमार बरनवाल है जो साल 2014 बैच के आईएएस ( गुजरात कैडर) हैं. वरुण लिखते हैं, ‘आज से 12 साल पहले मैं सोच भी नहीं सकता था कि मैं कभी इस मुकाम पर पहुंचूगा. मुझे नहीं पता था कि मैं कभी हाई स्कूल में दाखिला भी ले सकूंगा. लेकिन आज मैं भारतीय प्रशासन में अधिकारी हूँ.

बता दें साल 2006 में पिता को खोने वाले वरुण ने घर का सबसे बड़ा बेटा होने के नाते सारी जिम्मेदारी उठाना शुरू कर दी थी. इतना ही नहीं उन्होंने पिता की साईकिल की दुकान को भी संभालना शुरू कर दिया था. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने 10 वीं क्लास में टॉप किया. इसके बाद उन्होंने 12 वीं कक्षा में भी काफी शानदार नंबर हासिल किए. वरुण की लगन देखकर उनके पिता के दोस्त ने वरुण का एडमिशन इंजीनियरिंग कालेज में करवा दिया था.

वरुण ने भी अपनी मेहनत की दम पर अकेदिमिक मेरिट स्कोलरशिप हासिल की. इस स्कोलरशिप की वजह से कुछ हद तक उनकी फीस का खर्चा कम हो गया था. इंजीनियरिंग पास करने के बाद वरुण ने प्राइवेट नौकरी न करने का फैसला लिया था. दरअसल उन्होंने आईएएस बनाने की तैयारी शुरू कर दी थी. अपनी मेहनत की दम पर उन्होंने एक बार में ही फिर यूपीएससी की परीक्षा निकाल ली थी. उन्होंने पहली बार में ही देश में 32वां रैंक हासिल किया था. वरुण की यह कहानी लोगों को बेहद पसंद आ रही है और उनके लिए एक प्रेरणा का काम कर रही है.

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