पुणे के दो लोगों ने पुरानी बसों से बनाए लेडीज टॉयलेट, महिलाओं को मिल रही काफी मदद

स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान की वजह से देश में लगभग सभी लोग स्वच्छता को लेकर जागरूक हो चुके हैं. उन्हें यह समझ आने लगा है कि हमारे देश और हमारे शहर को स्वच्छ रखना हमारी ही जिम्मेदारी है. जगह-जगह अब हमें कचरा डालने के लिए कूड़ादान और टॉयलेट्स दिखाई देते हैं. यहां हम आपको 2 ऐसे शख्सों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने पुरानी बसों का इस्तेमाल करके लेडीज टॉयलेट बनाया है. जी हां, आपने सही पढ़ा यह सच है. यह काबिले तारीफ काम करने वाले शख्स पुणे के रहने वाले हैं जिनका नाम है उल्का सादलकर और राजीव खेर.

इन दोनों ने मिलकर पुणे नगर निगम की पुरानी बसों को लेडीज टॉयलेट्स में तब्दील किया है. वैसे स्वच्छ भारत के हिसाब से यह काम काबिले तारीफ़ है. आपको बता दें कि उल्का और राजीव ने इन टॉयलेट्स का नाम दिया है ‘ती’. बता दें कि मराठी भाषा में ‘ती’ शब्द महिलाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है. बात करें बसों में बनाई गई टॉयलेट्स की तो इसमें वेस्टर्न और इंडियन दोनों स्टाइल के टॉयलेट बनाए गए हैं. इसके अलावा इसमें वॉशबेसिन और बच्चों के डायपर बदलने के लिए भी जगह बनाई गई है. इन बसों में काफी कम कीमतों पर सैनेटरी नैपकीन भी बेचे जाते हैं.किसी भी महिला को इस टॉयलेट को यूज़ करने के लिए 5 रुपए देने होंगे. वैसे कंपनी यह शुल्क नहीं लेना चाहती थी लेकिन आर्थिक कारणों की वजह से उन्हें यह शुल्क लेना पड़ा.

बताते चलें ये बसें सोलर एनर्जी से चलती हैं और हर बस के लिए एक महिला कर्मचारी भी रखी गई है और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए बस में टीवी भी लगाए गए हैं. इन Entrepreneurs ने अपनी कंपनी का नाम Saraplast रखा है जो कि साल 2016 से ऐसे टॉयलेट बना रही है. अभी तक कंपनी के पास ऐसे 11 टॉयलेट्स हैं और ये सभी महिलाओं द्वारा खूब पसंद किए जा रहे हैं.

इस प्रेरणास्पद काम करने के पीछे के आईडिया के बारे में उल्का सादलकर ने बताया कि हमने पढ़ा था कि पुरानी बसों को बेघरों के लिए घर बनाने के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. इसी कॉन्सेप्ट को हमने महिला टॉयलेट के लिए इस्तेमाल किया क्योंकि हमारे देश में महिला टॉयलेट एक बड़ी समस्या है. बताते चलें कि यह कंपनी इवेंट्स के लिए मोबाइल टॉयलेट भी अवेलेबल करवाती है.

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