चार बार विधायक रहे लेकिन आजतक नहीं बदलवा पाए घर की टीन, इनके इमानदारी की लोग खाते हैं कसमें

खंडवा इंडोर ये विधान सभा से 4 लगातार विधायक के पद पर चयनित होना कोई आसान बात नहीं है ये बहुत ही ईमानदार हैं और इनकी ईमानदारी की कसमे खायी जाती हैं ! ये इतने ईमान दार थे के लोग इनको बहुत चाहने लगे थे किसी भी पार्टी के लिए इतना ईमानदार विधायक मिलना एक आशीवार्द ही है आगे जनता चाहे तो ऐसे विधयक को और बड़े पद पर चयनित कर सकती है अगर वह चाहे तो लकिन ऐसा नहीं हुआ इनके साथ इन्होने अपनी काम पूरी इमां दारी से किया पपेर उसके बाद भी उनको रघुराज सिंह को टिकट नहीं दिया गया !और 2003 के बाद इन्होने कोई चुनाव नहीं लड़ा ! ये आज आम इंसान की ज़िन्दगी गुज़र रहें हैं !

ईमानदार समाज सवेकी

ये बिलकुल एक ईमानदार समाज सवेकी के रूप में काम करते रहे ! कोई भी नेता सबसे पहले अपनी आर्थिक इस्थिति सुधरता है गाड़ी बांग्ला सभी सुख सुविधा लेता है लकिन रघुसिंघ ने ऐसा कुछ भी नहीं किया सबसे पहले उन्होंने जनता की सेवा की और समाज का पैसा समाज पर ही लगाया !
राणा रघु राज सिंह तोमर 4 बार विधायक के रूप में काम करते रहे उसके बाद भी जब उन्होंने टिकट की दावेदारी की तो उनसे 14 लाख रूपया माँगा गया !

इस पर रघु सिंह ने इंकार कर दिया और इस वजह से उनको दावे दार का टिकट नहीं दिया गया ! क्यूंकि उनके पास अपने घर के टीन को बदलवाने तक के पैसे नहीं थे !आज उनकी हालत बहुत ही खस्ताहाल हो चुके हैं ! यादो के रूप में वो एक जीप उनके घर के बहार खरी हुई है जोकि लोन पर ले गयी थी और उस पर विधायक की तख्ती लगी हुई है ! जोकि सुनहरे रंग की तख्ती आज भी चमकती हुई है ! उन पुराने दिनों की याद दिलाता है

ये विधायक निमानखेड़ा से खरे हुए थे 1977 से 1980 , 1980 से 1985, 1990 से 1992, 1993 से 1997 और इतने साल कार्य रत रहे ! और आज पुंसा ब्लॉक में मुख्यालय से 10 किमी दूर एक गांव में रीछफॉल के नाम से एक घर में रह रहें हैं !
इनको पैशन के तोर पर 35 हज़ार मिलते हैं जिससे वह अपने पोते पोतियों के पढ़ाई का खर्चा भी उठाते हैं उनके बेटे नारायण सिंह भी उनके साथ रहते हैं !

अनशन पर बैठे

खुद विधायक बने के बाद भी अपनी सरकार के होते हुए भी वह समाज के लिए अनशन पर बैठे थे ! 1971 में उनको कैदी बना कर जेल में बंद किया गया और फिर 1975 में मीसा बंदी रहे इनकी ईमानदारी इतनी थी की ये विधायक होते हुए भी इन्होने बस में टिकट ले कर बैठे थे तोमर ने बतया है की 140 अकड़ ज़मीन है उनके पुरखों के पास लकिन ये अपनी विधायक होने के बाद भी अपनी ज़मीन नहीं ले सके !

रिश्वत

तोमर बताते हैं की एक बार जब वो विधायक के पद पर आसीन थे तो 18 क्वाटर गिर चुके थे जोकि nvda के थे तो उन्होंने ये मामला विधान सभा में ले कर गए और ये मुद्दा वहां उदय तो इस पर कुछ लोगों ने इस मामले को ख़तम केरने के लिए ५ लाख की रिश्वत देनी चाही तो इन्होने उनको डांट कर भगा दिया था !
तोमर ने बताया की एक बार यूरिया खाद में मुरुम मिला कर बाजार में बेचा जा रहा था तो इस मामले को तोमर ने विधान सभा में उठाया और इस मामले को रफा दफा करने के लिए मालिक ने मुझे १५ लाख की रिश्वत देनी चाही लकिन मेने उसको भी भगा दिया था ! इस प्रकार कितनी बार मुझे रिश्वत देनी चाही पर मेने कभी नहीं ली !

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