अंतरिक्ष से भी दिखाई देती है ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’, जानिए मूर्ति से जुड़ी कुछ खास बातें

कुछ दिन पहले ही देश के पहले गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्मदिन के मौके पर गुजरात में सरदार सरोवर बांध से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का पीएम मोदी ने लोकार्पण किया था. तभी से हर कोई इस मूर्ति से जुड़े तथ्य जानने को बताब है. यह बात हम सभी को पता है कि यह मूर्ति दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति है. वैसे तो इस मूर्ति की कई खास बातें हैं लेकिन इस मूर्ति से जुड़ी एक और खास बात सामने आई है.

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दरअसल यह मूर्ति अंतरिक्ष से दिखती है. इस मूर्ति की हाल ही में एक फोटो समाने आई है. इस फोटो को 15 नवंबर को लिया गया था. इस फोटो को अमेरिका की एक सैटेलाइट कंपनी ने लिया है. सामने आई फोटो में आप देख सकते हैं. मूर्ति ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ साफ दिख रही है. 182 मीटर ऊची इस मूर्ति का डिजाइन पद्मश्री से सम्मानित सुतार ने तैयार किया है.

182 मीटर यानी 597 फुट ऊंची ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है. इसके बाद चीन की स्प्रिंग बुद्ध मंदिर 153 मीटर दुनिया की सबसे ऊंची दूसरी प्रतिमा होगी. जापान में स्थित 120 मीटर ऊंची प्रतिमा उशिकु दायबुत्सु तीसरे नंबर पर और अमेरिका की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी 93 मीटर के साथ चौथे नंबर पर है.

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‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को बनाने में 5,700 मीट्रिक टन यानी करीब 57 लाख किलोग्राम स्ट्रक्चरल स्टील का इस्तेमाल हुआ. साथ ही 18,500 मीट्रिक टन छड़ का इस्तेमाल किया गया है. 18 हजार 500 टन स्टील नींव में और 6,500 टन स्टील मूर्ति के ढांचे में लगी है. 17 सौ टन कांसे का इस्तेमाल मूर्ति में जबकि 1,850 टन कांसा बाहरी हिस्से में लगा है. 1 लाख 80 हजार टन सीमेंट कंक्रीट का इस्तेमाल निर्माण में किया गया है. जबकि इसमें 2 करोड़ 25 लाख किलोग्राम सीमेंट का इस्तेमाल किया गया.

इस स्टैच्यू को तेज हवाओं और भूकम्प का कोई असर नहीं होगा. 6.5 रिक्टर पैमाने पर आए भूकंप के झटकों में भी मूर्ति की स्थिरता बरकरार रहेगी. साथ ही 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं को झेल सकती है. 6 लाख किसानों ने मूर्ति के लिए लोहे का दान दिया. इसमें 135 मीट्रिक टन लोहे का दान मिला जो इसमें इस्तेमाल हुआ है. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का कुल वजन 1700 टन है. अक्टूबर 2014 मेंलार्सन एंड टूब्रो कंपनी को इस स्टेचू को बनाने का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था. माना जा रहा है कि इसके निर्माण में करीब 3000 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं.

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